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एकता परिषद भू अधिकार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अहिंसात्मक जन आंदोलन है. लोगों की आवाज सुनी जाए इसके लिए एक बड़े पैमाने की राष्ट्री अभियान की नींव रखी गयी थी, जिसे जनादेश 2007 कहा गया, जिसके माध्यम से 25 हजार लोगों ने राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच कर अपनी आवाज बुलंद की.

Monday, 21 May 2012

शौक से मिली पहचान


महज 8वीं तक की शिक्षा, कोई व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं और एक कस्बे में बचपन से युवावस्था तक का समय गुजारने वाले कुलदीप तिवारी की पहचान आज एक डॉक्युमेंट्री फिल्मकार के रूप में है. विकास के मुद्दे पर कई फिल्में बना चुके हैं एवं कई देशी-विदेशी फिल्मकारों को उन्होंने फिल्म बनाने में सहयोग किया है. यह सबकुछ उन्होंने अपने विश्वास, लगन एवं शौक को पेशेवर तरीके से पूरा करने के जुनून से हासिल किया है. उनके द्वारा निर्मित, निर्देशित एवं संपादित प्रमुख फिल्मों में ‘‘यूथ फॉर एनर्जी इंपावरमेंट’’, ‘‘लैंड फर्स्ट मेला’’, ‘‘ऑन फूट फॉर राइट’’, ‘‘स्टेप टुवार्ड जनादेश’’ एवं ‘‘जनादेश 2007’’ प्रमुख हैं. केन्या की राजधानी नैरोबी एवं नेपाल की राजधानी काठमांडू में विकास के मुद्दे पर कुलदीप की फोटो प्रदर्शनी भी हुई है.

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के जौरा कस्बे में 3 जुलाई 1979 को जन्मे कुलदीप तिवारी बचपन में ही मां के प्यार से वंचित हो गए. एक निम्नवर्गीय परिवार में विभिन्न कठिनाइयों के बीच पढ़ाई से उनका मोह भंग हो गया एवं 8वीं के बाद पढ़ाई छूट गई. इसके बाद जीवन के प्रति कोई खास लक्ष्य नहीं था एवं खाली बैठे रहने से बेहतर कुछ कमाई करने के उद्देश्य से वे विडियोग्राफी का काम करने लगे. श्री तिवारी बताते हैं, ‘‘भले ही मुझे साल भर काम नहीं मिलता था, पर उस काम में मुझे मजा आता था. मैं दिल लगाकर उस काम को किया करता था. ज्यादा काम नहीं होने से दोस्तों के साथ वक्त यूं ही बर्बाद करता था.’’

भूमि अधिकार के मुद्दे पर कार्यरत एकता परिषद को 1999 में आयोजित एक पदयात्रा की विडियोग्राफी की जरूरत महसूस हुई एवं जौर में एक स्टूडियो वाले ने कुलदीप तिवारी को इस काम के लिए भेज दिया. श्री तिवारी के लिए यह जीवन में बदलाव लेकर आया. उनके काम को देखकर एकता परिषद ने उन्हें अपने साथ जोड़ने का निर्णय लिया. एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक रनसिंह परमार कहते हैं, ‘‘कुलदीप को हमने 2001 में महात्मा गांधी सेवा आश्रम के तहत संचालित संसाधन केंद्र में कार्यालय सहायक के रूप में रख लिया. वह केंद्र में निश्चिंत बैठने के बजाय अपनी हूनर को तराशने में लगा रहा एवं जब भी मौका मिला, उसने अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया.’’ एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजगोपाल पी.व्ही. याद करते हैं, ‘‘कुलदीप ने ‘‘जनादेश 2007’’ के दरम्यान हमारी चिंताओं को दूर किया था. उस समय मीडिया समन्वयक
के रूप में देशी-विदेशी सभी मीडियाकर्मियों का प्रबंधन तो किया ही, साथ ही यात्रा का एक बेहतरीन डॉक्युमेंट्री बनाया, जो संगठन के लिए एक अमूल्य निधि है.’’

संसाधन केंद्र के तत्कालीन प्रभारी रह चुके एकता परिषद के राष्ट्रीय सचिव अनिल गुप्ता बताते हैं, ‘‘कुलदीप एक आत्मविश्वासी युवा है. वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद फिल्म बनाने के हूनर को तराशने का काम करता था. अपने काम के प्रति समर्पण से उसने भाषागत एवं टेक्निकल बाधाओं को पार किया.’’

कुलदीप की प्रतिभा को देखते हुए संगठन ने उसे एक माह के प्रशिक्षण के लिए नासिक में ‘‘अभिव्यक्ति मीडिया फॉर डेव्हलोपमेंट’’ में भेजा. वहां उन्होंने डॉक्युमेंट्री फिल्म की कुछ बारीकियों का अध्ययन किया. बिहार में पदयात्रा के दरम्यान सहयोग कर रहे प्रसिद्ध डॉक्युमेंट्री फिल्मकार सहजो सिंह से कुलदीप ने डिजिटल कैमरा हैंडलिंग के गुर सीखे. लंदन के
विश्वविख्यात फोटोग्राफर साइमन विलियम्स जब भी एकता परिषद के कार्यक्रम में भाग लेने भारत आए, कुलदीप को उनसे फोटोग्राफी के बारे में कुछ जानने एवं समझने का मौका मिला.

कुलदीप वर्तमान में एकता परिषद की स्वतंत्र इकाई ‘‘एकता मीडिया - विकास संचार के लिए मीडिया केंद्र’’ के समन्वयक हैं. वे विकास पर फिल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े होने के साथ ही जल, जंगल, जमीन के मुद्दे के साथ एकता परिषद के आंदोलनों पर फिल्म बनाने वाले विदेशी एवं देशी फिल्मकारों को मदद करने का काम कर रहे हैं.

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