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एकता परिषद भू अधिकार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अहिंसात्मक जन आंदोलन है. लोगों की आवाज सुनी जाए इसके लिए एक बड़े पैमाने की राष्ट्री अभियान की नींव रखी गयी थी, जिसे जनादेश 2007 कहा गया, जिसके माध्यम से 25 हजार लोगों ने राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच कर अपनी आवाज बुलंद की.

Monday, 21 May 2012

हिंसा के लिए सरकार दोषी

नई दिल्ली.  देशव्यापी जनसंवाद यात्रा पर निकले जाने-माने गांधीवादी राजगोपाल पी. वी. ने सरकार पर अड़ियल और असंवेदनशील रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके अड़ियल रवैये के कारण ही अहिंसक आंदोलन अब हिंसक होने लगे हैं. इस वर्ष राजधानी में होने वाले जनसत्याग्रह आंदोलन की तैयारी के सिलसिले में अब तक 17 राज्यों में 47 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरा कर चुके राजगोपाल ने एक साक्षात्कार में कहा कि जनादेश यात्रा के दबाव में वन अधिकार अधिनियम बनवाने में सफलता मिली और उसे लागू करने की दिशा में कुछ प्रयास भी हुए. इनमें लगभग 20-30 प्रतिशत ऐसे लोग होंगे, जिन्हें बहुत कम मात्रा में जमीन मिली, इसीलिए इस अधिनियम को ईमानदारी से लागू करने की बात अभी भी उठाने की जरूरत है. भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर पुनर्विचार के लिये सरकार बाध्य हुई है और पुनर्वास को लेकर एक विधेयक पास किया गया है. राजगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार छोटे-बड़े सभी आंदोलनों को कुचलने की कोशिश में है. सरकार के अड़ियल रवैये से ही तमाम अहिंसक आंदोलन हिंसक होते गए. यह एक प्रकार से सरकार की अपनी पराजय है. भूमिहीन, आदिवासी, घुमंतू जातियां और मछुआरों को जनसत्याग्रह की ताकत करार देते हुए राजगोपाल ने कहा, "भूमि अधिग्रहण और गरीबों के पक्ष में भूमि सुधार न होने से पलायन बड़ी समस्या बन गई है. शहर में जैसे-जैसे झुग्गी झोपड़ियों की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे शहरवासियों की समस्याएं भी बढ़ेंगी क्योंकि भारत के किसी भी शहर में गरीबों को बसाने या उन्हें न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी नहीं है." राजगोपाल ने कहा, "विकास के नाम पर हम संसाधनों के साथ जो व्यवहार कर रहे हैं उस कड़वे सच को समझने में हम जितनी देर करेंगे, उतना ही स्वयं को नुकसान पहुंचाएंगे. पूरे देश में आज आंदोलन का माहौल है. भ्रष्टाचार को लेकर हो, बांध को लेकर हो या जल, जंगल और जमीन को लेकर हो. शायद समय आ गया है कि सब लोग मिलकर दूसरी आजादी की बात जोरदार ढंग से कहें और व्यवस्था परिवर्तन के लिये माहौल बनायें." कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी द्वारा भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर की गई पद यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भूमि मुद्दे को लेकर राहुल की पद यात्रा अपने आप में इस बात को साबित करती है कि आज भूमि अहम मुद्दा है. उन्होंने कहा, "पद यात्रा के दौरान राहुल गांधी को समझ आया होगा कि किसान की क्या समस्याएं हैं. सरकार चलाने वाली पार्टी से जुड़े हुये व्यक्ति होने के कारण वह चाहें तो इस दिशा में बहुत कुछ कर सकते हैं. राहुल ने एक कदम तो उठाया है दूसरा कदम भी उठाने की जरूरत है. अपनी सरकार को किसान, आदिवासी और वंचित समाज के पक्ष में खड़ा करना उनकी सफलता मानी जायेगी और इतिहास सही कदम के लिए उन्हें याद रखेगा. अगर वह पहले कदम पर ही रुक जाते हैं तो यह उनकी नासमझी होगी." अन्ना हजारे को अपने आंदोलन से जोड़ने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं निरंतर कोशिश में हूं कि हर आंदोलन और हर संगठन से संवाद करूं और उनको साथ लेते हुए आगे चलूं. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के लिए भी दरवाजा खुला है. जितना मेरे से बन पड़ा उतना सहयोग मैंने उन्हें दिया है, अब उन्हें तय करना है कि वे किस प्रकार आम लोगों और वंचितों के जल, जंगल और जमीन के मुद्दे से जुड़ना चाहते हैं." राजगोपाल ने कहा, "जनसत्याग्रह को लेकर सरकार क्या रुख अपनाएगी यह कहना कठिन है. आंदोलनकारी लोग संघर्ष और संवाद दोनों की तैयारी में हैं. हमने बार-बार सरकार को लिखा है कि अगर संवाद से समस्या हल करना चाहें तो हम तैयार हैं. चूंकि हमें अहिंसक आंदोलन पर पूरा भरोसा है, अत: हमारी ओर से आंदोलन पूर्णरूप से अहिंसात्मक रहेगा. मैं अभी भी उम्मीद कर रहा हूं कि भगवान सरकार को सद्बुद्धि देंगे और सरकार अपने अड़ियल रवैये से बाहर निकल कर देश के वंचितों के लिए सोचेगी और काम करेगी."

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